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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा – नाबालिग की गवाही पर भरोसा करना मुश्किल, लैंगिक शोषण का दोषी शख्स बरी

तारीख: 14 नवंबर, 2021
स्रोत (Source): न्यूज 18 हिंदी

तस्वीर स्रोतन्यूज 18 हिंदी

स्थान : महाराष्ट्र

नाबालिग बालिका के लैंगिक शोषण से जुड़े एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में दोषी करार दिए व्यक्ति को बरी किया. हाईकोर्ट ने कहा कि, नाबालिग बालिका ठीक तरह से बयान देने और उस घटना को याद करने में असक्षम है इसलिए उसकी गवाही विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती है. हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर भी उठाए सवाल.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग से लैंगिक दुराचार के मामले में दोषी एक व्यक्ति को पीड़ित नाबालिग बालिका के बयान से संतुष्ट नहीं होने की वजह से बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि नाबालिग बालिका होने के कारण ना तो वह उस घटना को याद करने में सक्षम है और ना ही सवालों के सही जवाब दे पा रही है इसलिए उसकी गवाही विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती है. इससे पहले स्पेशल कोर्ट ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पोकसो) के तहत 4 वर्षीय बालिका से लैंगिक दुराचार के आरोप में उक्त व्यक्ति को दोषी करार दिया था. उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाए.

जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने क्या पीड़िता से यह जानने के लिए सवाल किया था कि क्या वह उससे पूछे गए सवालों को समझने में सक्षम है और उसका तर्कसंगत जवाब दे रही है. उन्होंने कहा कि न्यायाधीश पीड़ित बालिका की योग्यता का मूल्यांकन करने और उसकी गवाही देने की क्षमता के बारे में उसकी संतुष्टि दर्ज करने में सफल नहीं रहे.

इस मामले में बरी व्यक्ति पेशे से पेंटर है. जिस पर 2017 में नाबालिग बालिका के लैंगिक उत्पीड़न का आरोप था. इसके बाद कोर्ट ने उसे 5 साल की सजा सुनाई थी और जुर्माना भी लगाया था. अभियोजन पक्ष ने कहा कि 11 मई 2017 को नाबालिग बालिका ने अपने साथ हुई ज्यादाती के बारे में मां को बताया था. इस आधार पर पुलिस ने केस दर्ज करके पेंटर और उसके साथ एक अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाया था.

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