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बलात्कार पीड़िता को बालक के पिता का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट पर मजबूर नहीं किया जा सकता

तारीख: 09 दिसंबर, 2021
स्रोत (Source): नवभारत टाइम्स

तस्वीर स्रोतनवभारत टाइम्स

स्थान : उत्तर प्रदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को व्यवस्था दी कि बलात्कार के मामले में पीड़िता को उसके बालक के पिता का पता लगाने के लिए डीएनए परीक्षण से गुजरने को मजबूर नहीं किया जा सकता.

अदालत ने इसके साथ ही बलात्कार के नाबालिग आरोपी की याचिका पर पोकसो अदालत द्वारा पीड़िता के बालक का डीएनए परीक्षण कराने के आदेश को दरकिनार कर दिया.

न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की पीठ ने आरोपी की याचिका के विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका को अनुमति देते हुए यह आदेश पारित किया.

 

उन्होंने कहा कि पोकसो अदालत के सामने सवाल यह था कि क्या जिस अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया उसने वाकई बलात्कार किया था. न कि यह पता लगाना कि उस वारदात के परिणामस्वरूप पैदा हुए बालक का पिता कौन है. गौरतलब है कि सुल्तानपुर जिले में 17 दिसंबर 2017 को एक महिला ने अपनी बेटी से बलात्कार किये जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग लड़के के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था.

 

किशोर न्याय परिषद के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने बलात्कार पीड़िता के बालक का डीएनए परीक्षण कराए जाने से संबंधित अर्जी दाखिल की थी लेकिन परिषद ने पिछली 25 मार्च को उसकी यह कहते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी थी कि यह याचिका केवल बचाव की प्रक्रिया के दौरान ही दाखिल की जा सकती है.

 

नवभारत टाइम्स की इस खबर को पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक करें.

 

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