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दिल्ली में दोबारा भीख मांगते न दिखें बेघर बालक, इसलिए नए साल से होगी ट्रैकिंग

तारीख: 25 अक्टूबर, 2021
स्रोत (Source): नवभारत टाइम्स

तस्वीर स्रोत : नवभारत टाइम्स

स्थान : दिल्ली

दिल्ली में 70 हजार से ज्यादा बेघर बालक हैं और इनमें से कई हजार बालक भीख मांगने पर मजबूर हैं. दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) इन दिनों ऐसे हॉट स्पॉट की पहचान कर रहा है, जहां रोजाना बालक भीख मांगते हुए नजर आते हैं. अब तक 60 से ज्यादा लोकेशन का पता किया गया है. अगले महीने तक यह संख्या 150 तक पहुंचने की उम्मीद है. डीसीपीसीआर ने अपनी इस मुहिम के साथ दो महीने में 10 रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 65 बालकों को रेस्क्यू किया है. आयोग का कहना है कि हमारे लिए बड़ी चुनौती बालकों का पुनर्वास है. खासतौर पर उन मामलों में जहां पैरंट्स उनसे यह काम करवा रहे हैं. DCPCR का कहना है कि रेस्क्यू किए गए बालक फिर से भिखारियों के जाल में ना फंसे, इसके लिए उनका एडमिशन, स्पॉन्सरशिप और ट्रैकिंग जरूरी है. इन बालकों की ट्रैकिंग के लिए जल्द ही मैनेजमेंट इंफर्मेशन सिस्टम (MIS) तैयार किया जाएगा, जो नए साल से काम करने लगेगा.

DCPCR दिल्ली में नवंबर तक 150 लोकेशन कवर कर लेगा, जहां बालक भीख मांग रहे हैं. DCPCR के चेयरपर्सन अनुराग कुंडु के अनुसार हम माइक्रो लेवल पर हॉट स्पॉट की पहचान कर रहे हैं, जैसे ट्रैफिक सिग्नल या मेट्रो स्टेशन के गेट. दो महीने में 65 बालक रेस्क्यू किए गए हैं. ये बालक चार कैटिगरी में हैं. पहला, जिनसे पैरंट्स भीख मंगवाते हैं या वे खुद बालकों के साथ भीख मांग रहे होते हैं. दूसरा, वे जिनके पैरंट्स नहीं हैं और उनके रिश्तेदार उनसे यह काम करवाते हैं. तीसरा, वे बालक जिनका कोई भी नहीं और वे सड़क पर हैं. चौथी कैटिगरी उन बालकों की है, जिनसे कोई गिरोह भीख मंगवा रहा है. ये बालक छोटा-मोटा सामान भी बेचते हैं.

आयोग बालकों को सड़क से रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (CWC) के सामने पेश करता है. अनुराग बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में इनके पैरंट्स पहुंच जाते हैं और चेतावनी देकर बालक उन्हें सौंप दिया जाता है. बालक का स्कूल में एडमिशन करवाने में मदद दी जाती है और जरूरत पर 2-4 हजार रुपये भी दिए जाते हैं. जिन बालकों का कोई सामने नहीं आता, उन्हें चिल्ड्रन होम भेज दिया जाता है.

अनुराग कहते हैं कि बालक पैरंट्स के पास वापस जाते हैं, तो कुछ समय बाद कई भीख मांगने का काम फिर से शुरू कर देते हैं. जिसे आयोग भी मानता है. बालकों को ट्रैक करना बड़ा चैलेंज है इसलिए हम विभाग के साथ जेजे MIS तैयार कर रहे हैं, जिससे हर बालक की ट्रैकिंग होगी. इसके लिए टेंडर जारी हो चुका है, नए साल में यह शुरू हो जाएगा. जो बालत रेस्क्यू होगा, उसे आईडी से साथ एनरोल किया जाएगा और फिर डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट या एनजीओ की मदद से इनके घरों पर जाकर इन्हें ट्रैक किया जाएगा. अभी करीब 10 से ज्यादा एनजीओ रेस्क्यू कैंपेन में हमारे साथ हैं.

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