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नाबालिग लड़की से पैदा बालक को अदालत ने पिता के हवाले करने का आदेश दिया

तारीख: 15 नवंबर, 2021
स्रोत (Source): नवभारत टाइम्स

तस्वीर स्रोतनवभारत टाइम्स

स्थान : दिल्ली

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग लड़की के साथ संबंध से जन्मे बालक को लड़की की सहमति के बाद दुष्कर्म का आरोप झेल रहे उसके जैविक पिता के हवाले करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि बालक को महिला आश्रय गृह में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जहां उसकी मां रहती है.

उच्च न्यायालय ने कहा कि लड़की अभी नाबालिग है और उसे संबंधित व्यक्ति के साथ रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. साथ ही कहा कि उसे बालिग होने तक आश्रय गृह में रखा जाएगा और उसके बाद वह जहां चाहती है वहां रहने के लिए स्वतंत्र होगी.

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने यह आदेश तब पारित किया जब अदालत में मौजूद लड़की ने कहा कि आठ अगस्त को पैदा हुए बालक को उस व्यक्ति को सौंप दिया जाए जो बालक का जैविक पिता है. लड़की ने कहा कि वह आश्रय गृह में रहने को तैयार है और अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती. आरोपी व्यक्ति के माता-पिता ने भी अदालत से कहा कि वे बालक की पर्याप्त देखभाल करेंगे.

उच्च न्यायालय ने कहा कि लड़की का परिवार उसके और व्यक्ति के बीच संबंधों के खिलाफ था और उन्होंने बालक को गोद लेने वाले किसी व्यक्ति को दे दिया था. हालांकि लड़की के माता-पिता ने बालक को किसी को गोद दिए जाने का खंडन किया था. उच्च न्यायालय ने 28 सितंबर को लड़की के माता-पिता द्वारा व्यक्ति के खिलाफ दर्ज बलात्कार और अपहरण के मामले में आरोपी को जमानत दे दी थी. हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालत के समक्ष प्रमुख मुद्दों में से एक, इस साल अगस्त में पैदा हुए बालक का संरक्षण था.

प्राथमिकी लड़की की मां की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें कहा गया था कि नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली उसकी बेटी इस साल 21 मार्च को स्कूल गई थी लेकिन वापस नहीं आई और उसे अपहरण होने का संदेह हुआ.

 

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