एक माह के बालक को मंदिर में दान देने के मामले में बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान, मंदिर में 5 वर्षीय एक और बालक है

तारीख: 09 अप्रैल, 2021
स्रोत (Source): जागरण

तस्वीर स्रोत: Google Image

स्थान: हरियाणा

 

हरियाणा के हांसी स्थित समाधा मंदिर में एक माह के मासूम बालक को समर्पित करने के अचंभित करने वाले मामले में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है. आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने मंदिर में बालकों से जुड़ा रिकॉर्ड तलब कर लिया है और जल्द मंदिर का दौरा भी करेंगी. वहीं, पूरे प्रकरण के बाद से मंदिर प्रशासन चुप्पी साध रखी है. मंदिर में एक 5 वर्षीय बालक भी है, जिसे कुछ वर्ष पूर्व एक परिवार ने मंदिर को समर्पित किया था.

हांसी के समाधा मंदिर में 7 अप्रैल, 2021 (बुधवार) को डडल पार्क निवासी माता-पिता द्वारा अपने एक महीने के बालक को समर्पित करने का मामला सामने आया था. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों को थाने में तलब कर लिया था.

पुलिस कार्रवाई को देखते हुए परिवार ने बालक को वापिस ले लिया था. पुलिस ने मंदिर से जुड़े महंत को भी चेतावनी दी थी. अंधविश्वास से जुड़ा ये मुद्दा मीडिया में आने के बाद 8 अप्रैल, 2021 (गुरुवार) को बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है. आयोग ने तुरंत मंदिर में बालकों से संबंधित रिकॉर्ड तलब करते हुए ऐसा करने वाले अभिभावकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही. इसके अलावा मंदिर में पूर्व दान किए गए बालकों को रेस्क्यू करवाने की भी बात चेयरपर्सन ने कही है.

ऐसा माना जाता है कि छोटी उम्र में मंदिरों को समर्पित किए गए बालकों को भविष्य में उसी मंदिर की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है व उनके पालन-पोषण का तरीका अनुशासन और समर्पण से भरा होता है. किसी सामान्य बालक को भविष्य में अपना पेशा चुनने का अधिकार होता है, जबकि मंदिर या देवस्थलों को समर्पित किए गए बालकों के पास यह अधिकार नहीं होता है. उनका पेशा पहले से ही निर्धारित होता है, जो मंदिर से ही जुड़ी कोई भूमिका होती है. अबोध बालकों को किसी देवस्थल को समर्पित करना उनके बचपन, वर्तमान व भविष्य के साथ अन्याय है. ऐसे बालकों को न माता-पिता व परिवार का प्यार मिलता है न ही अपने लिए एक उज्जवल भविष्य चुनने का अधिकार.

 

 

 

 

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